गीत – कोयल ना बोले, री!

सखी! कोयल ना बोले, बोले ना कोयल,
कोयल ना बोले, री!

सेमर रुख न पाती लागे,
फूल न बिकसे रंगी.
धरा गरम हो फूटन लागी,
तरसे पानी पानी.

कोयल ना बोले सखी, कोयल ना बोले, री!

दिन भए लंबे, रात अमावस,
जन मन सूखन लागे.
मेघ, अमेघ ठगूआ ठहरे,
अन्खियन धार न पानी.

कोयल ना बोले सखी, कोयल ना बोले, री!

अब कहूँ साजन, पाती भेजो,
बरूण देब रिझाई.
अरज हमारी तुम से भगवन,
क्यों हमको बिसराई.

सखी री! कोयल ना बोले, बोले ना कोयल री!

Steve Hilton / Rich Stearns Ghana Visit - Kpalang Village; People Fetching Water From Dirty Pond

Poem: School

ये बातें पुरानी तो नहीं,
पर वक़्त की धूल जम गयी है उन पर,
एक कच्चा-पक्का स्कूल – पहाड़ों के बीच,
और पीपल की कोपलों से भरा पेड़,
जिसकी छाँव में खेलते थे बच्चे,
और पकड़ते थे भटभटिया कीड़ा.

थमा सा वक़्त,
जैसे सदियाँ समेटे – हर लम्हा,
कहाँ जा रहे थे, मैं, तुम और हम सभी ?
कहीं भी तो नहीं – शायद कहीं नहीं,
बस उस लम्हे की पोर पोर को –
छूते, जीते,
धड़कन, धड़कन.PPJ

Poem: Khoya Hissa

एक अरसा हुआ –
दरिया किनारे खेलते हुए ,
कुछ भूल आया हूँ .
पर कुछ तो है ;Khoya_Hissa_rajesh_kumar_joshi
जो अपने वजूद से जुड़ा है.
शायद , एक टुकड़ा खुद का .

बहुत याद करता हूँ ,
पर याद नहीं आता .
जैसे रेत का कोई टुकड़ा ,
किनारे पर ही खो जाये .
और फिर इसकी,
कोई शक्ल भी तो नहीं , रंग नहीं ,
और न कोई आवाज़ .
बस चुप सा , कुछ – कुछ सहमा ,
एक नज़र पड़े , तो सिमटता सा , छुपता सा .

यूँ तो महसूस नहीं होता,
पर अक्सर समंदर के पास ,
रेत की खरास में चुभता है .
किसी अधभरे घाव की तरह .