गीत – कोयल ना बोले, री!

सखी! कोयल ना बोले, बोले ना कोयल,
कोयल ना बोले, री!

सेमर रुख न पाती लागे,
फूल न बिकसे रंगी.
धरा गरम हो फूटन लागी,
तरसे पानी पानी.

कोयल ना बोले सखी, कोयल ना बोले, री!

दिन भए लंबे, रात अमावस,
जन मन सूखन लागे.
मेघ, अमेघ ठगूआ ठहरे,
अन्खियन धार न पानी.

कोयल ना बोले सखी, कोयल ना बोले, री!

अब कहूँ साजन, पाती भेजो,
बरूण देब रिझाई.
अरज हमारी तुम से भगवन,
क्यों हमको बिसराई.

सखी री! कोयल ना बोले, बोले ना कोयल री!

Steve Hilton / Rich Stearns Ghana Visit - Kpalang Village; People Fetching Water From Dirty Pond

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